April 2009

दो देवियों के हाथ में होगी सत्ता की चाबी

कांग्रेस और भाजपा दोनों ही 150-150 के आसपास ही निपट जाएंगे। यूपीए सरकार बनवाने वाले वामपंथी, द्रमुक, राजद, लोजपा, सपा को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। मायावती और जयललिता की सीटें बढ़ेंगी। इन दोनों के हाथों में होगी सत्ता की चाबी।

अगर चुनाव घोषणापत्र के आधार पर मतदाता फैसला करेंगे, तो भारतीय जनता पार्टी का पलड़ा भारी रहेगा। सबसे ज्यादा लोकलुभावन घोषणापत्र भाजपा ने ही पेश किया है। भाजपा के घोषणापत्र को पढ़कर लगता है कि वह 2004 की गलती को सुधारना चाहती है। तब उसने आम आदमी की उपेक्षा करके उच्च मध्यम और अमीर लोगों की ओर देखना शुरू कर दिया था। नतीजतन अटल बिहारी वाजपेयी की छह साल की शानदार उपलब्धियों के बावजूद भाजपा को 35 सीटों का नुकसान उठाना पड़ा। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ने आठ महीने पहले फरवरी 2004 में लोकसभा भंग करके मध्यावधि चुनाव करवाने का एलान किया तो ऐसा नहीं लगता था कि भारतीय जनता पार्टी चुनाव हार जाएगी। वह मानकर चल रही थी कि अटल बिहारी वाजपेयी की लोकप्रियता जवाहर लाल नेहरू को भी पार कर गई है। इसलिए वाजपेयी पूरी उम्र प्रधानमंत्री पद पर बने रहेंगे। भाजपा भारत उदय के रथ पर सवार होकर अमर होने की कोशिश कर रही थी।

नई बीजेपी, हिंदुओं को मंदिर, मुस्लिमों को तालीम

बीजेपी ने शाईनिंग इंडिया की गलती सुधारी। जैसा अपन ने कल लिखा था- 'तो पुराने मुद्दों के साथ रोटी- रोजगार का भी वादा होगा।' सो अब बीजेपी राम के साथ गरीब रथ पर भी सवार। घोषणापत्र जारी करते राजनाथ सिंह ने कहा- 'बीजेपी अपने घोषणापत्र के हर शब्द का पालन करेगी।' तो अपन बता दें- घोषणा पत्र में गरीबों, किसानों, मिडिल क्लास के लिए तोहफे ही तोहफे। सैनिकों को सैलरी पर इनकम टेक्स नहीं। समान रैंक-समान पेंशन का भी वादा। गरीबों को दो रुपए किलो चावल-गेहूं। किसानों के सारे कर्ज माफ। नए कर्ज पर ब्याज सिर्फ चार फीसदी। इनकम टेक्स तीन लाख के बाद शुरू होगा। औरतों और बुर्जुगों को पचास हजार की और छूट। सीनियर सिटीजन की उम्र पैंसठ से घटाकर साठ होगी। पेंशन पर इनकम टेक्स भी नहीं। आम आदमी को मिले बैंक ब्याज पर टेक्स नहीं। सीएसटी-एफबीटी खत्म होगा। बीजेपी का इनकम टेक्स का चेप्टर देख कांग्रेस पसीनों-पसीने हो गई।

पवार की दोहरी सदस्यता पर कांग्रेस में खलबली

तो यूपीए का सारा कुनबा ही बिखर गया। वाइको, चंद्रशेखर राव, रामदौस तो गए ही। लालू, मुलायम, पासवान भी बाहर। अब पवार भी इशारे करने लगे। यूपीए में बची सिर्फ ममता। वह भी चुनाव बाद पक्की नहीं। ममता का असली घर एनडीए। यूपीए तो सिर्फ खेत की ढाणी। आप कहेंगे पवार का तो सीट एडजेंटमेंट हो चुका। अपन भूल भी जाएं। पर पवार क्यों भूलेंगे। सोनिया देशभर में तालमेल की बात मान जाती। तो यह दिन देखना ही नहीं पड़ता। अपने पी. चिदम्बरम मुंह लटकाए हुए थे। जब पूछा- 'पवार का सीपीएम-बीजेडी के साथ जाना कैसा लगा?' तो बोले- 'एनसीपी से उड़ीसा में तालमेल तो नहीं। पर पवार का हमारे विरोधियों से जा मिलना ठीक नहीं।' वैसे पवार भी उसी दिन उड़ीसा गए। जिस दिन सोनिया उड़ीसा में थी। तेवर दिखाने का असर भी हुआ। कांग्रेस ने गुजरात में एक सीट की पेशकश कर दी। राजकोट न सही, सूरत सही। इसे कहते हैं- दिया जब रंज बुतों ने, तो खुदा याद आया। यों पवार की टेढ़ी चाल से कांग्रेस की चाल बेढंगी हो गई।

वरुण को अभिमन्यु की तरह घिरा बताया मेनका ने

हस्तिनापुर का राजा था पांडु। पांडु की दो बीवियां थी मादरी और कुंती। पांडु को श्राप मिला- बच्चे पैदा करने  की कोशिश करेगा तो मर जाएगा। डरकर पांडु ने अपना राज-काज धृतराष्ट्र को सौंप दिया। धृतराष्ट्र अंधा था। पर था पांडु का बड़ा भाई। पर बाद में कुंती को युधिष्ठिर, भीम, अर्जुन पैदा हुए। मादरी को नकुल और सहदेव। ये पांचों बच्चे कैसे पैदा हुए। अपन इस कहानी की गहराई में नहीं जाते। वह कहानी बताने का आज वक्त नहीं। पर पांडु श्राप के कारण ही मर गया। मादरी सती हो गई। पांडु की मौत का कारण मादरी ही थी। पर सवाल सिहासन की विरासत का। धृतराष्ट्र ने पांडु के पांडव बेटों को राज गद्दी नहीं सौंपी। जबकि राज गद्दी के वारिस पांडव थे। महाभारत इसीलिए हुआ। कहानी हू-ब-हू भले नहीं। पर कुछ कुछ मिलती-जुलती।

ज्यूडिशरी ने लोकतंत्र को कलंकित होने से बचाया

वरुण गांधी अब तीन हफ्ते तो अंदर समझिए। यूपी सरकार का सलाहकार बोर्ड तीन हफते में एनएसए का फैसला करेगा। जब से वरुण सुर्खियों में आए। तब से राहुल गांधी पहले पेज से गायब थे। पहले पेज की तो बात ही छोड़िए। अखबार से ही गायब थे। अब जब वरुण कम से कम तीन हफ्ते अंदर रहेंगे। तो राहुल गांधी ने महाराष्ट्र से अपना प्रचार शुरु किया। शुरुआत में ही उनने बिना नाम लिए अपने चचेरे भाई पर हमला किया। बोले- "समाज बांटने की बात करती है बीजेपी। कांग्रेस ही एक पार्टी जो समाज को जोड़ती है।" अपन ने किसी चैनल पर वरुण का इतना लंबा भाषण कभी नहीं सुना। जितना राहुल गांधी का लाइव सुनने को मिला। जिस भाषण पर विवाद खड़ा किया। वह भी छह मार्च का था। पर सोलह मार्च तक अपन ने किसी चैनल पर नहीं सुना। चैनलों को वह सीडी दस दिन बाद कहां से मिली। वह भी काई चैनल नहीं बता रहा। हां, अपन जानते हैं - चुनाव आयोग को यह सीडी कांग्रेस ने दी।

India Gate se Sanjay Uvach

Wed, 14 Dec 2011

जनसत्ता 14 दिसंबर, 2011:  पिछले दिनों दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब में एक अत्यंत गंभीर विषय पर चर्चा हुई। विषय था, देश में बच्चों के अपहरण की बढ़ रही घटनाएं। विषय की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि बच्चों के अपहरण पर शोध आधारित पुस्तक का विमोचन करने के लिए सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश अल्तमस कबीर खुद मौजूद थे। इस गंभीर समस्या का सनसनीखेज खुलासा 1996 में हुआ था, जब यूनिसेफ ने भारत में बच्चों के देह-शोषण पर एक रिपोर्ट जारी की थी। बी भामती की इस रिपोर्ट