September 2008

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आठ महीने सीक्रेट रही चिट्ठी प्रस्ताव में नत्थी

कृपया गौर करिए। मनमोहन सिंह के खुश होने पर न जाईए। अमेरिकी कांग्रेस ने किस शर्त पर वन-टू-थ्री को मंजूरी दी। खुशी के मारे उसे अनदेखा न करें। मनमोहन अपनी जिद में सब शर्तें मानने को राजी। पर क्या आप लोग उन शर्तों को नहीं देखेंगे? क्या उन शर्तों पर गौर नहीं करेंगे? क्या देश का भला-बुरा सब मनमोहन पर छोड़ देंगे? अपन ने मनमोहन को देश का भाग्यविधाता नहीं चुना।

देश के साथ विश्वासघात

एटमी करार से देश का परमाणु शक्तिसंपन्न होने और सुरक्षा परिषद सीट का दावा हमेशा-हमेशा के लिए खत्म हो गया। मनमोहन सिंह एटमी ऊर्जा के लिए देश की सुरक्षा को गिरवी रखने के साथ-साथ आतंकवाद के लिए देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए भी याद किए जाएंगे।

एटमी करार के कारण भारत-अमेरिका के रिश्तों में व्यापक बदलाव आ रहा है। पाकिस्तान में भी निजाम बदलने से अमेरिका के साथ उसके रिश्तों में बदलाव आ रहा है। परवेज मुशर्रफ के परिदृश्य से हटने को अलकायदा अपनी जीत मान रहा है।

कांग्रेस उलझी टिकटों की बंदरबांट में

कमलनाथ, दिग्विजय सिंह, ज्योतिरादित्य और सुरेश पचौरी अपने-अपने समर्थकों को ज्यादा से ज्यादा टिकटें दिलवाने में मशगूल। अर्जुन सिंह टिकटों की बंदरबांट से दूर रहकर तमाशा देख रहे हैं, वह अपना खेल आखिर में शुरू करेंगे। मध्यप्रदेश में भाजपा को हराना खाला जी का घर नहीं। पिछले चार विधानसभा चुनावों में भाजपा हमेशा 39 फीसदी से ज्यादा वोट हासिल करती रही है जबकि कांग्रेस 1990 और 2003 में 31-32 फीसदी वोटों तक लुढ़क चुकी है।

मध्यप्रदेश में कांग्रेस और भाजपा में हमेशा कांटे की टक्कर रही है। लगातार कई साल तक दोनों पार्टियों में करीब दो फीसदी का वोट अंतर रहता था। जिसके वोट दो फीसदी ज्यादा हो जाते थे, वह सरकार बना लेता था।

मोदी का बरी होना नहीं पचा बनर्जी को

सांसद खरीद फरोख्त की कहानी में नया मोड़ आ गया। जिस कार ड्राइवर का जिक्र अपन ने यहीं पर किया था। उस ड्राइवर हशमत की गुरुवार को पेशी थी। हशमत ने पहले खुद हल्फिया बयान दिया था। बकौल अमर सिंह- 'ड्राईवर मेरे घर पहुंचा। उसने बयान बदलने के लिए पांच करोड़ मांगे। पहले मैंने शिवराज पाटिल को फोन पर कहा- पुलिस भेजो। पर वह बोले- कांग्रेस इसमें उलझना नहीं चाहती। फिर मैंने खुद पुलिस को बुलाया।' हशमत को ले जाते मीडिया ने खुद देखा। वह चिल्ला रहा था- 'मेरा अपहरण किया गया।'

आतंकियों की हिमायत में मुशर्रफ जैसी दलील

कांग्रेस में जंगलराज की हालत। सोनिया की रहनुमाई में पार्टी की ऐसी दुर्दशा होगी। अपन ने कभी सोचा नहीं था। एक नेता कुछ कहता है, तो दूसरा कुछ और। मनमोहन सिंह की करनी-कथनी को ही देख लीजिए। एक पल कुछ और तो दूसरे पल कुछ और। उस दिन राष्ट्रपति भवन में गवर्नर कांफ्रेंस थी। तो मनमोहन खुफिया ढांचे के तहस-नहस होने पर गरजे। आतंकवाद के खिलाफ सख्त कानून की वकालत की। मनमोहन से इशारा पाकर कई छुटभैय्ये भी बोले।

सोनिया को लेकर पाटिल पहुंचेंगे मेंगलूर

कर्नाटक में राजनीतिक घमासान शुरू हो गया। कांग्रेस मौके का फायदा उठाने की फिराक में। तो येदुरप्पा भी हर ईंट का जवाब पत्थर में देने को तैयार। अपने पाटिल ने पहले दो हिदायतें भिजवाई। फिर कुमावत की रहनुमाई वाली टीम। टीम मंगलवार को बेंगलुरु-मेंगलूर घूम ली। नौकरशाही की क्या मजाल। जो येदुरप्पा के लॉ एंड आर्डर को दुरुस्त बता दे। जहां तक बात कानून व्यवस्था की। तो येदुरप्पा ने ताल ठोककर कहा- 'कर्नाटक का लॉ एंड आर्डर दिल्ली से बेहतर। कांग्रेस हालात सुधारने में मदद के बजाए आग में घी डालना छोड़े।'

येदुरप्पा में है दूसरा मोदी बनने का मादा

अपने नरेंद्र मोदी ने शिवराज पाटिल का जमकर बाजा बजाया। बोले- 'पाटिल का सूचना से ज्यादा भोज पर जोर।' टाइम पर भोजन करना बुरी बात नहीं। पर जब बम फूट रहे हों। लोग तड़प-तड़प कर मर रहे हों। तो होम मिनिस्टर के मुंह से निवाला निकलता कैसे होगा। मोदी बोले- 'मैं जब आतंकियों से मिले सुराग बता रहा था, पाटिल बार-बार घड़ी देख रहे थे। मुझसे बोले- जानकारियां तो आती रहेंगीं, मेरे लंच का टाईम हो चुका।' लगते हाथों अपन पाटिल के कपड़े बदलने की पुरानी बात बताते जाएं।

धर्मांतरण के अधिकार से उपजा टकराव

कर्नाटक, केरल, मध्यप्रदेश में चर्च के खिलाफ आक्रोश हिंदू देवी-देवताओं के खिलाफ आई नई किताब 'सत्यदर्शनी' के कारण फैला। धर्म प्रचार के अधिकार का इस्तेमाल दूसरे धर्म के खिलाफ विषवमन के लिए नहीं होना चाहिए।

उड़ीसा में स्वामी लक्ष्मणानंद की हत्या के बाद उग्र हिंदू संगठनों ने ईसाईयों के खिलाफ जगह-जगह पर हिंसक वारदातें की। हिंसा में जानमाल की भारी हानि हुई। उड़ीसा की आग अभी ठंडी भी नहीं पड़ी थी कि कर्नाटक में हिंसक वारदातें शुरू हो गईं। कर्नाटक के बाद केरल और मध्यप्रदेश में भी हिंदुओं का गुस्सा ईसाईयों के खिलाफ फूट पड़ा।

दो आतंकी भाग गए तो पाटिल का क्या कसूर

अपने मीडिया में भी तिस्ता सीतलवाड़ों, पीयूडीआर, पीयूसीएल जैसों की कमी नहीं। कहीं मुठभेड़ हुई नहीं। लगेंगे फर्जी बताने। इस बार तो इलाके की मुस्लिम जनता को भी भड़काया। ठीक उसी तरह, जैसे 1999 में विमान अपहरण के समय भड़काया था। शुक्रवार को दिल्ली के जामिया इलाके में आतंकियों से मुठभेड़ हुई। मुठभेड़ खत्म भी नहीं हुई थी। सबसे तेज चैनल के मानवाधिकारी खबरची ने कांग्रेस  ब्रीफिंग में पूछा- 'मुठभेड़ को फर्जी बताया जा रहा है। कांग्रेस का क्या कहना है?'

यूपीए सियासत की देन है इंडियन मुजाहिद्दीन

कांग्रेस को आतंकवाद पर अपनी गलत नीतियों का अहसास हो चुका है, लेकिन चुनावों से ठीक पहले नीतियों में यू टर्न से भाजपा को फायदा पहुंचने के डर से ठिठकी हुई है। देश की सियासत वोट बैंक का शिकार हो गई है।

यूपीए सरकार और खासकर उसकी सबसे बड़ी घटक कांग्रेस संकट से जूझ रही है। कांग्रेस ने अंदाज भी नहीं लगाया था कि उसकी तुष्टिकरण की नीति उसके गले की हड्डी बन जाएगी। पिछले चार साल तक वामपंथी दल यूपीए सरकार की अल्पसंख्यक तुष्टिकरण और आतंकवादी तुष्टिकरण नीति के भागीदार थे।