August 2008

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इटली के इशारे पर उड़ीसा में सीबीआई जांच की बात

लो विकास दर पर भी अपनी भविष्यवाणी सही निकली। अपने मनमोहन-चिदंबरम जब दस फीसदी का ढोल पीट रहे थे। तब अपन ने 13 अगस्त को लिखा था- 'देख लेना विकास दर की भी पोल खुलेगी।' वही हुआ। अप्रेल-मई-जून के आंकड़े आ गए। तीन महीनों में विकास दर 7.9 फीसदी रही। जिस मुद्दे को उठा लीजिए। बंटाधार किया मिलेगा। जीडीपी और महंगाई की बात तो सब के सामने। आतंकवाद-भ्रष्टाचार भी किसी से छिपा नहीं।

गुजरात मॉडल ही बेड़ा पार करेगा भाजपा का

कांग्रेस जीती तो सुभाष यादव को ही पेश करना पड़ सकता है पचौरी का नाम, रैलियों में प्रस्ताव पास करके कांग्रेसी मुख्यमंत्री नहीं बनते। मुख्यमंत्री तो विधायक दल की बैठक में सोनिया गांधी को अधिकृत करने वाले प्रस्ताव से ही तय होगा।

मध्य प्रदेश में चुनावी शतरंज के लिए बिसात बिछ गई है। कांग्रेस अभी तय नहीं कर पा रही कि वह किसे चुनावी बारात का दूल्हा बनाए। हालांकि कांग्रेस में दूल्हों की कमी नहीं, अलबत्ता दूल्हे ज्यादा बाराती कम हैं। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की राजनीति चुपके से काम करने की रहती है।

बीजेपी को नहीं पची हत्या की नक्सली थ्योरी

राजनीति नेता से क्या-क्या नहीं करवाती। अपने मनमोहन सिंह को ही देखो। जब तक सोनिया को लेकर बिहार की बाढ़ का हवाई सर्वे नहीं किया। तब तक लोग डूबते-मरते, भूख से बिलबिलाते रहे। केंद्र से राहत नहीं भेजी। सोनिया-लालू-पासवान समेत शिव की बारात लेकर बिहार गए। तब राहत राशि का मुंह खोला। राजनीति जम्मू में भी कम नहीं हुई। कंधमाल में भी कम नहीं हो रही।

नक्सली-चर्च गठजोड़ तो और खतरनाक होगा

उड़ीसा का कंधमाल इलाका। जहां आजकल हिंदू-ईसाई सांप्रदायिक तनाव। अपन को 22 जनवरी 1999 की याद आ गई। तब ईसाई मिशनरी ग्राहिम स्टेन्स की हत्या हुई थी। स्टेन्स अपने दो बेटों के साथ कार में सो रहे थे। तीनों को जिंदा जला दिया गया। तब अटल बिहारी वाजपेयी ने कहा था- 'स्टेन्स के हत्यारों को माफ नहीं किया जाएगा।' अब अस्सी साल के स्वामी लक्ष्मणानंद की हू-ब-हू वैसे ही हत्या हुई।

टीडीपी के बाद अब तिरुपति से प्रजाराज्यम्

तिरुपति की ठीक वही जगह। जहां मार्च 1982 में नंदमूरि तारक रामाराव ने टीडीपी बनाई थी। यानी एनटीआर की तेलुगूदेशम पार्टी। छब्बीस साल बाद उसी तिरुपति में अब प्रजाराज्यम्। एक और फिल्मी हस्ती चिरंजीवी का नया राजनीतिक दल। फर्क सिर्फ इतनाभर। एनटीआर ने मुअजिज लोगों का महानाडु बुलाया था। पर चिरंजीवी ने लाखों लोगों की रैली कर डाली। लाखों लोगों का हुजूम अपन ने ठीक इसी जगह 1992 में देखा था।

कश्मीर के हालात नेहरू की गलतियों का नतीजा

कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी बेहद खफा दिखे। खफा दिखे- बीजेपी ने उन्हें आतंकियों का चीयर्स लीडर क्यों कहा। इसका जवाब अरुण जेटली ने बाखूबी दिया। वह बोले- 'मुस्लिम तुष्टिकरण अब पुरानी बात हो गई। कांग्रेस अब अलगाववादियों-आतंकवादियों का तुष्टिकरण करने लगी।' यह बात अपन ने तेईस अगस्त को लिखी ही थी।

संसदीय समिति ऐसी जांच में सक्षम नहीं

सांसदों की खरीद-फरोख्त के मामले में जांच समिति का काम करीब-करीब पूरा हो गया है। कार्यकाल बढ़ाया नहीं गया, तो इस हफ्ते रिपोर्ट सौंप दी जाएगी। लोकसभा स्पीकर सोमनाथ चटर्जी भी यह मानकर चल रहे हैं कि रिपोर्ट इस हफ्ते आ जाएगी। इसलिए उन्होंने चार सितंबर को संसद की गिरती साख पर गोलमेज कांफ्रेंस बुलाने का फैसला किया है। सोमनाथ चटर्जी को एक कड़े स्पीकर के तौर पर याद किया जाएगा।

प्याज खाकर जूते खाने वाली बात न हो जाए

अपन ने कल कांग्रेस के चार संकटों का जिक्र किया। जम्मू, स्टिंग, शिबू और एनएसजी। आज उन चारों की आगे पड़ताल। हुआ वही, जो अपन को शुरू से लगता था। एनएसजी ने एटमी ऊर्जा ईंधन व्यापार की छूट नहीं दी। पहली अगस्त को जब आईएईए ने करार पर मुहर लगाई। तब अपन ने लिखा था- 'रुकावटें अभी खत्म नहीं हुई। एनएसजी की शर्तें तो अपन की हालत ईरान जैसी बना देगी।'

कांग्रेस के चार संकट,जम्मू, स्टिंग, शिबू और एनएसजी

यूपीए सरकार की एक मुसीबत हो तो बताएं। आखिरी दिनों में कुकरमुत्तों की तरह उग आई मुसीबतें। आखिरी दिनों की मुसीबत कितनी भारी पड़ती है। यह बीजेपी से बेहतर कोई नहीं जानता। आखिरी महीने में प्याज के भाव ने दिल्ली में बीजेपी के आंसू निकाले। यों कांग्रेस की मुसीबतें तो सारी खुद की खड़ी की हुई।

और अब अलगाववादियों का तुष्टिकरण

अमरनाथ यात्रा के मार्ग में पड़ने वाले बालताल गांव के पास जंगलात विभाग की जमीन यात्रा के दौरान दो महीनों के लिए श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड को दी गई थी। अलगाववादी हुर्रियत कांफ्रेंस की ओर से इसका कड़ा विरोध किए जाने के कारण गुलाम नबी सरकार ने अपने इस फैसले को वापस लिया। जम्मू कश्मीर के लोग इसे तत्कालीन कांग्रेस सरकार की आतंकवादियों के तुष्टिकरण का कदम मानते हैं। यही वजह है कि दो महीने बीत जाने के बावजूद जम्मू के लोगों का आंदोलन मध्यम नहीं पड़ा है।