June 2008

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जैसे भ्रष्टाचार नेताओं का जन्मसिध्द अधिकार हो

बीजेपी आलाकमान ने खाट खड़ी की। तो इतवार की रात एमपी भवन में मीटिंग हुई। रात बारह बजे तक चली मीटिंग। सीएम शिवराज चौहान के साथ मौजूद थे नरेंद्र तोमर और माखन सिंह। हेल्थ मिनिस्टर अजय विशनोई भी तलब किए गए। रास्ता नहीं बचा था। सो अजय विशनोई से इस्तीफा मांगा गया। भले ही इस्तीफे के बाद सीएम ने ना-नुक्कर की। ना-नुक्कर का मतलब अपने मंत्री को दूध का धुला बताना। पर इस्तीफे का फरमान खुद दिल्ली से लेकर गए थे। अजय विशनोई शुक्रवार को सुर्खियों में आए। जब विशनोई के भाई पर इनकम टेक्स के छापे पड़े। मंत्री बनने से पहले विशनोई का धंधा भी हेल्थ से जुड़ा था। मंत्री भी हेल्थ के बना दिए गए। वैसे राजनीतिक मर्यादा इसकी इजाजत नहीं देती। पर कहां रही मर्यादा?

पर चार जेटली कहां से लाएंगे राजनाथ सिंह

अर्जुन के तीरों को समझना आसान नहीं। जैसे चिदंबरम का बजट पहली नजर में समझ नहीं आता। वैसे ही अर्जुन के तीर फोरन समझ नहीं आते। सो अर्जुन ने जो तीर शनिवार को वर्किंग कमेटी में चलाएं। कांग्रेसी इतवार को उसका चीर-फार कर रहे थे। तभी एक और ठाकुर ने तीर चला दिए। अर्जुन ने कर्नाटक की हार का ठिकरा मंहगाई के सिर फोड़ा। तो निशाना मनमोहन पर था। सोनिया ने अर्जुन को चापलुसी से रोका था। तीर चलाने से नहीं। यानि हार का ठिकरा सोनिया की रहनुमाई पर नहीं। अलबत्ता मनमोहन की मनेजमेन्ट पर। बीजेपी के ठाकुर राजनाथ सिंह ने भी मनमोहन पर तीर चलाई।

क्षत्रपों के बिना नहीं उभरेगी कांग्रेस

सोनिया ने हारों से सबक लेकर कमेटी बनाने का फैसला किया है, लेकिन लालकृष्ण आडवाणी क्षत्रपों को उभारकर पार्टी की जड़ें जमा रहे हैं। कांग्रेस के अब देश में सिर्फ 656 विधायक, जबकि भाजपा के 940 हो गए हैं।

अगर कोई कांग्रेस के घटते ग्राफ और भाजपा के बढ़ते ग्राफ की वजह पूछना चाहें, तो मैं कहूंगा कि कांग्रेस में क्षत्रप उभरने नहीं दिए जा रहे और भाजपा में क्षत्रप दिन-प्रतिदिन ताकतवर हो रहे हैं। चार दशक पहले तक कांग्रेस अपनी क्षत्रप नेताओं की वजह से एक मजबूत पार्टी थी, इंदिरा गांधी ने एक-एक करके क्षत्रपों को खत्म कर दिया और कांग्रेस को केंद्रीय नेतृत्व के इर्द-गिर्द सीमित कर दिया। दूसरी तरफ पिछले पांच सालों में भाजपा ने नरेंद्र मोदी, वसुंधरा राजे, प्रेम कुमार धूमल, मेजर भुवन चंद्र खंडूरी और अब येदुरप्पा को क्षत्रप के तौर पर उभरने का पूरा मौका दिया है।