May 2008

  • strict warning: Non-static method view::load() should not be called statically in /home/ajayseti/public_html/sites/all/modules/views/views.module on line 906.
  • strict warning: Declaration of views_handler_argument::init() should be compatible with views_handler::init(&$view, $options) in /home/ajayseti/public_html/sites/all/modules/views/handlers/views_handler_argument.inc on line 744.
  • strict warning: Declaration of views_handler_filter::options_validate() should be compatible with views_handler::options_validate($form, &$form_state) in /home/ajayseti/public_html/sites/all/modules/views/handlers/views_handler_filter.inc on line 607.
  • strict warning: Declaration of views_handler_filter::options_submit() should be compatible with views_handler::options_submit($form, &$form_state) in /home/ajayseti/public_html/sites/all/modules/views/handlers/views_handler_filter.inc on line 607.
  • strict warning: Declaration of views_handler_filter_boolean_operator::value_validate() should be compatible with views_handler_filter::value_validate($form, &$form_state) in /home/ajayseti/public_html/sites/all/modules/views/handlers/views_handler_filter_boolean_operator.inc on line 159.
  • strict warning: Declaration of views_plugin_style_default::options() should be compatible with views_object::options() in /home/ajayseti/public_html/sites/all/modules/views/plugins/views_plugin_style_default.inc on line 24.
  • strict warning: Declaration of views_plugin_row::options_validate() should be compatible with views_plugin::options_validate(&$form, &$form_state) in /home/ajayseti/public_html/sites/all/modules/views/plugins/views_plugin_row.inc on line 134.
  • strict warning: Declaration of views_plugin_row::options_submit() should be compatible with views_plugin::options_submit(&$form, &$form_state) in /home/ajayseti/public_html/sites/all/modules/views/plugins/views_plugin_row.inc on line 134.
  • strict warning: Non-static method view::load() should not be called statically in /home/ajayseti/public_html/sites/all/modules/views/views.module on line 906.

भूली-बिसरी वर्किंग कमेटी की याद आई सोनिया को

अपने अभिषेक मनु सिंघवी का जवाब नहीं। गुर्जर आंदोलन पर बोले। तो वसुंधरा राजे को रानी-महारानी कह गए। पता नहीं सिंघवी का जमहूरियत से भरोसा क्यों उठा। वसुंधरा तो बाकायदा चुनी हुई सीएम। चुनाव में रहनुमाई भी वसुंधरा की थी। मनमोहन सिंह की तरह कतई नहीं। न पहले चुनाव में रहनुमाई की। न अब करेंगे। न जनता ने चुना, न चुने हुए सांसदों ने। सिंघवी की तरह वसु कभी राज्यसभा में भी नहीं रही। फिर सिंघवी का सीएम को रानी-महारानी कहना। अपन को खुन्नस के सिवा कुछ नहीं लगा। गुर्जर आरक्षण पर कांग्रेस का स्टेंड पूछा। तो बंदे के जुबान लड़खड़ाने लगी।

दिया जब रंज बूतों ने तो माया को खुदा याद आया

राजस्थान की आग अब दूर-दूर तक फैल गई। रेल मार्गों के बाद गुरुवार को सड़कें भी जाम हुई। पड़ोसी राज्यों यूपी, हरियाणा में तो असर हुआ ही। जम्मू कश्मीर तक असर हुआ। जहां गुर्जरों को पहले से एसटी का दर्जा। जम्मू कश्मीर के गुर्जरों ने सवाल उठाया- 'सारे देश में गुर्जरों को एसटी का दर्जा क्यों नहीं।' सो तीन हजार गुर्जर सड़कों पर उतर आए। वसुंधरा राजे जम्मू कश्मीर में भी मशहूर हो गई। वहां भी वसुंधरा के पुतले जले। बदनाम होंगे, तो क्या नाम न होगा। राजनीतिक हमला करने वाले भी बिलों से निकल आए। दिल्ली से कांग्रेस वसुंधरा पर बरस रही थी। लखनऊ से मायावती।

किस-किस राज्य को संभालेंगी सोनिया

गुर्जरों के आंदोलन की आंच दिल्ली पहुंची। तो दिल्ली की राजनीतिक हलचल तेज हो गई। अपनी वसुंधरा ने गेंद केंद्र के पाले में फेंकी। तो मनमोहन ने हंसराज भारद्वाज के पाले में। अब भारद्वाज के पाले से गेंद फिर वसुंधरा के पाले में। इससे साबित हुआ- 'धरती गोल है।' राजनीति का चक्र घूमना शुरू। कर्नाटक के बाद अब सोनिया बाकी राज्य बचाने में जुटी। सो मुकुल वासनिक, वीरेंद्रसिंह, पी सी जोशी, हेमाराम चौधरी दौरा करेंगे। टीम में अपने गहलोत का नाम नहीं। टीम आंदोलन के शहीदों के घर जाएगी। हमदर्दी के दो शब्द कहेगी। जरूरत पड़ी तो स्टेंड पर भी आधा-अधूरा ही सही। मुंह खोलेगी।

गुर्जरों को एसटी दर्जे पर ऐसे कन्नी काटी कांग्रेस

सौ साल पहले गुर्जर चाहते थे- उन्हें क्षत्रीय माना जाए। आज कह रहे हैं- 'हमें अनुसूचित जनजाति का दर्जा मिले।' पर गुर्जर हैं क्या? अपन इतिहास के पन्ने पलटें। तो गुर्जरों की कई कहानियां मिलेंगी। पहली कहानी- हूण दो गुटों में बंट गए। रेड हूण और सफेद हूण। रेड हूण यूरोप चले गए। सफेद हूण ऑक्सेस घाटी पार कर काबुल में घुसे। काबुल में उनने किशन साम्राज्य पर कब्जा किया। फिर भारत में घुस आए। कहानी है- वे जॉर्जिया से आए। जो अंग्रेजी में 'जी' से शुरू होता है। जॉर्जिया का अपभ्रंश ही गुर्जर- गुज्जर हुआ। वे जॉर्जिया से मध्य एशिया, इराक, ईरान, अफगानिस्तान से खैबर दर्रा पार कर भारत में घुसे। दूसरी कहानी- गुर्जर असल में राजपूत थे। मुगलों ने भारत पर हमला किया। तो औरंगजेब से राजपूतों का एक समझौता हुआ। समझौता था- 'राजपूत युध्द में हार गए। तो उनका एक बड़ा हिस्सा मुस्लिम बन जाएगा।'

ओखली में सिर दिया तो अब भुगते यूपीए

अपने मुरली देवड़ा मंगलवार को मनमोहन सिंह से मिले। तो उनने पेट्रोलियम कंपनियों को घाटे का ब्यौरा दिया। संसद का बजट सत्र खत्म हुआ। तब से पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ने की अटकलें। पर अपन को पहले से पता था। कर्नाटक चुनाव तक कीमतें नहीं बढ़नी। सो नहीं बढ़ी। अपनी सरकार है, सो हर मामले में राजनीति से परहेज क्यों। अमेरिका होता, तो राष्ट्रपति देश को आर्थिक घाटे का जिम्मेदार ठहरा दिया जाता। पर मनमोहन ने चुनावी फायदे के लिए महीना भर कीमतें रोके रखी। अब कीमतें बढ़ेंगी, इससे मुरली देवड़ा ने कभी इनकार भी नहीं किया। अपने अभिषेक मनु सिंघवी भी दो टूक शब्दों में कह चुके- 'देश कीमतें बढ़ने के लिए तैयार रहे।' सो कीमतें तो बढ़ेंगी ही। आज नहीं तो कल। पर सरकार भी आम लोगों को हलाल करने पर आमादा।

सीएम प्रोजेक्ट किए तो जाल में फंसेगी कांग्रेस

कर्नाटक में जब कांग्रेस की लुटिया डूब रही थी। तो सोनिया अपनी बेटी प्रियंका के घर नाते-नाती से खेल रही थी। सोनिया बारह बजे से पांच बजे तक प्रियंका के घर रही। राजीव जब पीएम थे। तो छुट्टियां मनाने की परंपरा दुबारा से शुरू की। यों जवाहर लाल नेहरू भी छुटि्टयां मनाने जाते थे। पहली बार उनने हिमाचल में छुट्टियां मनाई। पर बाद में पीएम छुट्टियों से कन्नी काटने लगे। राजीव अलग तरह के राजनीतिबाज थे। उनने अपने यहां यूरोपियन रिवाज लागू किया। हफ्ते में दो दिन छुट्टियों का। फाइव डे वीक राजीव की देन। सोनिया तो ठहरी ही यूरोपियन। सो हार में वह क्यों अपना संडे बर्बाद करती।

अब आडवाणी का ख्वाब ख्याली पुलाव नहीं

कर्नाटक में कांग्रेस क्या हारी। सबको कांग्रेस की फिक्र पड़ गई। अपन दिनभर एक चैनल पर रहे। बार-बार यही सवाल दागा गया-'अब कांग्रेस का क्या होगा। कांग्रेस को क्या करना चाहिए'। मीडिया कांग्रेस की हालत पर दुबला हो चला है। पर अपन उन लोगों में नहीं। जो देश से ज्यादा कांग्रेस की फिक्र करे। कांग्रेस ने परिवारवाद अपनाकर खुद अपनी जड़ों में मटठा डाला। अपन उन लोगों में भी नहीं। जो कांग्रेस के लिए नेहरु-गांधी परिवार को जरूरी समझें। सोनिया के बिना भी नरसिंह राव 145 सीटे लाए थे। सोनिया के बिना भी सीताराम केसरी 141 सीटें लाए थे।

आतंकवाद राष्ट्रीय मुद्दा घोषित किया जाए

फैडरल जांच एजेंसी ही नहीं, फैडरल कानून और फैडरल अदालत की भी जरूरत। आतंकवाद से लड़ने के लिए राज्यों और राजनीतिक दलों को तुच्छ राजनीति छोड़नी होगी।

इसी पखवाड़े राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के नोएडा में डा. राजेश तलवार और डा. नूपुर तलवार की चौदह साल की बेटी आरुषि की हत्या हो गई। नोएडा पुलिस ने पहले दिन हत्या के फौरन बाद से गायब घरेलू नौकर हेमराज पर शक किया। हेमराज की तलाश में पुलिस टीम नेपाल भेज दी गई। अगले दिन डा. तलवार के घर की छत पर हेमराज की लाश मिली, तो पुलिस के होश उड़ गए। नोएडा पुलिस लगातार सात दिन तक हवा में तीर मारती रही और अफवाहों को हवा देती रही।

तो मनमोहन ने पैदा की यूरेनियम की फर्जी कमी

यों कहावत तो है- जख्मी शेर ज्यादा हमलावर हो जाता है। पर अपन दुविधा में। शिवराज पाटिल को शेर कहें कैसे? पर चारों तरफ से घिरे पाटिल अब ज्यादा हमलावर। सो बांग्लादेशियों के मुद्दे पर बेनकाब हुए पाटिल अब गुर्जरों के मुद्दे पर हमलावर हों। तो अपन को हैरानी नहीं होगी। बांग्लादेशियों के मुद्दे पर उनने वसुंधरा से खार खा ली। सो अब वसुंधरा केंद्र से नए हमले का इंतजार करें। जब तक पाटिल-वसुंधरा का नया वाकयुध्द हो। तब तक अपन बात करें पाटिल के अफजल वाले बयान की। जिस पर देश में बवाल मचा। पर पाटिल बचाव में नहीं उतरे।

आतंकियों-घुसपैठियों की पीठ पर देश का गृहमंत्री

जब बाड ही खेत को खाने लगे। तो खेत का खुदा ही रखवाला। गृहमंत्री शिवराज पाटिल पर यह कहावत एकदम फिट। देश को ऐसा गृहमंत्री न पहले कभी मिला। न आगे कभी मिलना। सोनिया गांधी को ऐसे प्रधानमंत्री और गृहमंत्री पर फख्र। जिनका न कोई राजनीतिक आधार। न जमीनी आधार। अपन तो पाटिल के बयान पर हैरान हुए। जब वह वसुंधरा राजे पर भड़कते हुए बोले- 'यह राजशाही नहीं। लोकतंत्र है।' जी हां, इसीलिए लातूर में हारकर वह देश के गृहमंत्री हो गए। इसीलिए दक्षिण दिल्ली में हारकर मनमोहन देश के पीएम हो गए। इसी लोकतंत्र की बात कर रहे हैं पाटिल। वसुंधरा को बता रहे हैं- 'यह राजशाही नहीं।' जो जनता के वोट से जीतकर सीएम बनी। जिसे किसी सोनिया ने नोमिनेट नहीं किया।