January 2008

महिला आरक्षण कांग्रेस के जी का जंजाल

सांप्रदायिकता भड़काने वाली सीडी का भूत फिर निकल आया। खुन्नस निकालने मायावती का भी जवाब नहीं। जिस लालजी टंडन के हाथ पर राखी बांधती थी। उसी हाथ में हथकड़ी का इरादा। अपने राजनाथ सिंह भी लपेटे में। यूपी चुनाव के दौरान सीडी का बवाल खड़ा हुआ। तो चुनाव आयोग के फरमान पर एफआईआर दायर हुई थी। बीजेपी ने सीडी से नाता तोड़ा, वापस ली। आयोग के कहने पर माफी भी मांगी। पर मायावती ताज घोटाले की खुन्नस निकालने पर उतारू। वाजपेयी के समय ताज घोटाले में न फंसती। तो बीजेपी-बसपा शादी भी न टूटती। अब जब मायावती ने सीडी का भूत निकाला।

एंटी इनकमबेंसी में निपटेंगे एमएलए

यों भले ही बीजेपी काउंसिल शांति से निपट गई। पर बाहर से दिख रही शांति, अंदर से वैसी नहीं। आखिर तक खुसर-पुसर चलती रही। वर्किंग कमेटी की शुरूआत राजनाथ ने करनी थी। समापन भाषण आडवाणी का था। रात साढ़े सात बजे जावड़ेकर की प्रेस कांफ्रेंस तय थी। पर बिना समापन भाषण के वर्किंग कमेटी निपटी। जावड़ेकर को इधर-उधर की बात करनी पड़ी। आखिर क्यों नहीं हुआ आडवाणी का भाषण? अपनी वसुंधरा राजे की गैर हाजिरी भी कौतुहुल का मुद्दा रही। काउंसिल में आई भी। तो अपने भाषण तक मंच पर नहीं पहुंची। भाषण में भी बाकी मुख्यमंत्रियों पर टिप्पणीं कर गई। बोली- 'अभी सब लोग ताल ठोककर गए हैं कि किसने कितनी तोपें बजाई हैं।' यह पहले बोलने वाले रमण, शिवराज पर कटाक्ष था। वह तो मोदी का भाषण सुने बिना ही उठ गई थी। उठते-उठते बैठी।

बीजेपी का चुनावी मंत्र - महिलाएं और मोदित्व

बीजेपी वर्किंग कमेटी में बिना बोले ही छा गए मोदी। सोमवार को काउंसिल में बोले, तो छाना ही था। पर राजनाथ का मोदीमंत्र बाकी सीएम को रास नहीं आया। मोदी की तारीफ से जैसे जल-भुन गए हों। अपनी वसुंधरा का वर्किंग कमेटी में नहीं आना खला। अपन को नहीं, हाईकमान को। काउंसिल में भी दोपहर बाद पहुंची। तो अपन ने लंबे समय बाद दिल्ली के खबरचियों से घुलते-मिलते देखा। शायद बिगड़ी छवि सुधारने की कोशिश। कुरेदा, तो राजनाथ के मोदी मंत्र से उखड़ी दिखी। बोली- 'सब राज्यों की परिस्थितियां अलग-अलग। सब जगह एक मंत्र नहीं चल सकता। कोशिश तो कर रहे हैं।'

गणतंत्र दिवस के दुकानदार

अपनी नई राष्ट्रपति का देश के नाम पहला संदेश। दूरदर्शन-आकाशवाणी से जारी हुआ। एक जमाना था- जब भाषण सुनने को देश थम जाता था। पर अब लोगों की दिलचस्पी घटने लगी। नेताओं की कथनी-करनी एक सी रहती। तो राष्ट्रपति के भाषण का बजट की तरह इंतजार होता। पर जब प्रतिभा पाटिल देश को संदेश दे रही थी। तो सारे प्राइवेट खबरिया चैनल किडनी रैकेट दिखा रहे थे। गुड़गांव में चल रहा था दुनिया का सबसे बड़ा किडनी रैकेट। अमेरिका, कनाडा, फ्रांस, इटली तक से आते थे किडनी के ग्राहक। बात इटली की चली। आप चौंकिए नहीं। अपन सोनिया की बात नहीं कर रहे। अपन बात कर रहे हैं कार्ला ब्रूनी की।

मुर्गेबाजों के रोजे शुरू हुए देशभर में

king-cock.jpgएक ऐसा प्रेस नोट जो आया नहीं। पर दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में चुहुलबाजी होती रही। बुध्ददेव सरकार लंबी तानकर सोई रही। सरकार वक्त पर जागती। तो सिंगूर, नंदीग्राम, नंदलाल मार्केट की आग वक्त पर बुझ जाती। बुध्ददेव लंबी तानकर न सोते। तो महाराष्ट्र की तरह बर्ड फ्ल्यू को वक्त पर काबू पा लिया जाता। गुरुवार को केबिनेट मीटिंग हुई। तो अपने शरद पवार ने बर्ड फ्ल्यू का हिसाब-किताब दिया। केबिनेट के बाद प्रियरंजन दासमुंशी बता रहे थे। अब दासमुंशी बोलेंगे, तो राजनीतिक तड़का लगाएंगे ही। सो उनने कहा- 'लेफ्टियों की सरकार ने एक हफ्ते देरी से केंद्र को जानकारी दी। बर्ड फ्ल्यू शुरू हुआ था चार जनवरी को। बंगाल सरकार ने केंद्र को बताया ग्यारह जनवरी को।' पर अपन बात आगे बढ़ाएं। पहले केंद्र सरकार की क्लास लेते जाएं।

सरकोजी न हुए मुसीबत हो गई

अपने गणतंत्र का महत्व देखिए। जनता के नेता जनता से सुरक्षित नहीं। गणतंत्र दिवस आते ही दिल्ली हर President Sarkozy will be India’s Guest on Republic Dayसाल किला बनने लगी। इंडिया गेट की सैर आम लोगों के लिए बंद। नेताओं की सुरक्षा की बात चली। तो एक दिलचस्प किस्सा सुनाते जाएं। अपनी यूपी की सीएम मायावती आजकल बेहद डरी हुई हैं। दो बार शिवराज पाटिल को एसपीजी के लिए लिखकर भेजा। मायावती को गैर कानूनी मांग पर परहेज नहीं। कोई आम आदमी गैर कानूनी काम करे। तो जेल भेज दिया जाए। पर एसपीजी की राजनीति के आगे सब बौने। केंद्र सरकार से जवाब नहीं बन पा रहा। सो मायावती ने 23 जनवरी को तीसरी चिट्ठी भिजवाई।

मोनार्क की जगह महारानी

नेताजी सुभाष चंद्र बोस पर होम मिनिस्ट्री के दस्तावेज डि-क्लासीफाईड हुए। पर सारे दस्तावेज अभी भी नहीं। सच जानने के लिए तीन आयोग बने। कांग्रेस सरकारों ने तीनों आयोगों में अडंग़ा लगाया। होम मिनिस्ट्री के दस्तावेज भी कभी नहीं दिए। पर आरटीआई के तहत अब जब दस्तावेज दिए। तो उसमें कुछ नया नहीं। वही कांग्रेसी सरकारों का पुराना स्टेंड- 'नेताजी 18 अगस्त 1945 को विमान हादसे में मारे गए थे।' यूपीए सरकार के ताजा कदम का बंगाल में क्या असर होगा। अपन नहीं जानते। पर नेहरू परिवार शक से बाहर नहीं होगा। जो दस्तावेज डि-क्लासीफाईड नहीं हुए। अब उनकी जंग होगी।

मिस्टर ब्राउन यह दर्द तो आपका दिया है

पाकिस्तान में अपने एक अजीज दोस्त हैं- शाहिद अब्दुल कयूम। वहां के एक टीवी चैनल में सीनियर सब एडिटर। चार साल पहले अपन जब पाक गए। तो कयूम से दोस्ती हुई। फिर गाहे--गाहे बजरिया ई-मेल बातचीत होती रही। कभी कभार एसएमएस भी। कयूम से हुई ताजा चर्चा पर आप भी गौर फरमाएं। लिखते हैं- 'मेरा देश जल रहा है। हालात बद से बदतर हो रहे हैं। आपने भी सीमा पार की बुरी खबरें सुनी होंगी। फिदायिन हमले, विद्रोही गतिविधियां। भुट्टो की हत्या के बाद राजनीतिक संकट। हमारी सीमाओं में जंग छेड़ने की अमेरिकी धमकियां। हमारे परमाणु बम की सुरक्षा का सवाल। आप क्या सोचते हैं- इस सबके लिए कौन जिम्मेदार है?'

अंदरूनी लोकतंत्र से ही उपजेगा जनाधार

अगर इस साल लोकसभा चुनाव नहीं भी हुए, तो भी आम चुनावों में अब सिर्फ सवा साल बाकी रह गया है। राजग ने छह साल केंद्र में सरकार चलाई, लेकिन आखिरी दिनों में भारतीय जनता पार्टी की इतनी बुरी हालत नहीं हुई थी, जितनी इस समय कांग्रेस की दिखाई देने लगी है। दिसंबर 2003 में मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ विधानसभाओं के चुनाव जीतने से भारतीय जनता पार्टी इतनी उत्साहित थी कि लोकसभा चुनाव वक्त से पहले करवा दिए। लोकसभा चुनावों में भाजपा से आठ सीटें ज्यादा जीतने से कांग्रेस इतनी उत्साहित थी कि उसे जनादेश मान बैठी।

महिलाओं को टिकट बीजेपी का नया पैंतरा

अपन ने बीजेपी की चुनावी रणनीति तीस दिसंबर को बताई थी। तब से टुकड़ों-टुकड़ों में बीजेपी तीन बार खुलासा कर चुकी। तीसरा खुलासा शुक्रवार को सुषमा ने किया। पर टुकड़ों-टुकड़ों में जो बातें सामने आईं। अपन ने सारी की सारी तीस दिसंबर को लिख दी थीं। उन्हीं में से एक थी- 'पिछले छह चुनावों में जीती 300 सीटों पर निशाने की।' यह खुलासा सुषमा स्वराज ने पंद्रह जनवरी को किया। उन्हीं में से एक थी- 'महिलाओं को टिकट की।' शुक्रवार को यह खुलासा हुआ। सुषमा स्वराज के घर हुई एक ग्रुप मीटिंग को छोड़ दें। तो शुक्रवार को तीसरी मीटिंग आडवाणी के घर हुई। आडवाणी के घर की बात चली। तो याद करा दें- आडवाणी की जब संघ से कुट्टी शुरू हुई। तो संघ के एक खेमे को एतराज इसी बात पर था।

India Gate se Sanjay Uvach

Wed, 14 Dec 2011

जनसत्ता 14 दिसंबर, 2011:  पिछले दिनों दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब में एक अत्यंत गंभीर विषय पर चर्चा हुई। विषय था, देश में बच्चों के अपहरण की बढ़ रही घटनाएं। विषय की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि बच्चों के अपहरण पर शोध आधारित पुस्तक का विमोचन करने के लिए सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश अल्तमस कबीर खुद मौजूद थे। इस गंभीर समस्या का सनसनीखेज खुलासा 1996 में हुआ था, जब यूनिसेफ ने भारत में बच्चों के देह-शोषण पर एक रिपोर्ट जारी की थी। बी भामती की इस रिपोर्ट