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November 2007

जनता बदलाव चाहती है : धूमल

हिमाचल, 27 नवंबर।  हिमाचल प्रदेश में चुनाव का अखाड़ा तैयार है और कमोबेश तीनों प्रमुख राजनीतिक दलों कांग्रेस, भाजपा और बसपा ने अपने-अपने उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया है। नेतृत्व के मुद्दे पर लंबे समय बाद भाजपा ने चुप्पी तोड़ी है। शांता कुमार की जगह प्रेम कुमार धूमल को तरजीह देते हुए पार्टी ने उन्हें अगले मुख्यमंत्री के तौर पर पेश कर दिया है। नेता घोषित होने के बाद 'जनसत्ता' से एक व

सदनों की सर्वोच्चता पर सरकारी हमला

अपने यहां लोकतंत्र के तीन अंग। लेजिस्लेचर, ज्यूडिश्यरी, एक्जीक्यूटिव। यानि चुने हुए सदन, अदालतें और सरकार। बहुत पुरानी बात नहीं। बात सिर्फ तीन साल पुरानी। जब झारखंड के गवर्नर सिब्ते रजी ने बिना बहुमत के शिबू सोरेन को सीएम बनाया। बहुमत साबित करने का वक्त भी अच्छा-खासा दे दिया। बहुमत अर्जुन मुंडा के साथ था। प्रोटर्म स्पीकर की तैनाती हुई। खरीद-फरोख्त शुरू हो गई।

उधर वर्दी उतरी इधर बखिया उधड़ी

जनरल परवेज मुशर्रफ की वर्दी आखिर उतर गई। इमरजेंसी लगाकर भी वर्दी नहीं बचा पाए। देखा अमेरिका का करिश्मा। सो  नरेंद्र मोदी अबके  चुनाव में मियां मुशर्रफ का मुद्दा शायद ही उठाएं। मोदी की बात चली। तो बताते जाएं। लालू की करनी कांग्रेस के सामने आ गई। लालू ने जिद करके बनर्जी आयोग बनवाया। जिसने कहा- 'गोधरा में आग बाहर से नहीं। डिब्बे के अंदर से लगी थी।' अब कांग्रेस को इस सवाल का जवाब देना होगा। बीजेपी के पहले इश्तिहार ने ही कटघरे में खड़ा कर दिया।

जग के ठुकराए लोगों को लो मेरे घर का खुला द्वार

कांग्रेस-लेफ्ट में लाख मतभेद। पर तस्लीमा के मुद्दे पर दोनों एक। तस्लीमा दोनों पार्टियों के लिए शाहबानो बन चुकी। जरा तस्लीमा के बारे में बता दें। तब बांग्लादेश नहीं बना था। पूर्वी पाकिस्तान था। जब मेमनसिंह में तस्लीमा अगस्त 1962 में पैदा हुई। तस्लीमा ने डाक्टरी पास की। सरकारी डाक्टर हो गई। पर लिखने का शौक घटने के बजाए बढ़ गया। बात शुरू हुई 1990 से।

तस्लीमा पर नित नया झूठ बोलती सीपीएम

पाक हो या बांग्लादेश। दोनों पड़ोसी अपना सिरदर्द। पाक से आतंकियों की घुसपैठ। तो बांग्लादेश से आबादी की घुसपैठ जारी। जहां तक पाक की बात। तो वहां राजनीतिक हालात नए मोड़ ले चुके। बेनजीर के बाद नवाज शरीफ को भी कबूल करना पड़ा मुशर्रफ को। दस सितंबर को घुसने नहीं दिया गया था। पर पच्चीस नवंबर का न्योता देने खुद गए। अमेरिका के दबाव में दोनों को कबूल किया। अब अमेरिकी दबाव में वर्दी भी उतरेगी। इमरजेंसी भी हटानी पड़ेगी।

कट्टरपंथ बंगाल में आतंकवाद यूपी में

पहले पाकिस्तान की अदालतें। अब अपनी। दोनों आतंकियों के निशाने पर। पर आप सोचेंगे। पाक में तो अदालतों का बाजा मुशर्रफ ने बजाया। तो अपन को मुशर्रफ आतंकियों से कम नहीं लगते। यह संयोग ही समझिए। बुधवार को एक अमेरिकी अखबार ने मुशर्रफ को सबसे बड़ा आतंकी लिखा। भले ही यह जार्ज बुश को न जचे। वैसे भी अपन कारगिल को नही भूले। जहां मुशर्रफ की आतंकियों से सांठगांठ थी। पर फिलहाल बात शुक्रवार को राम-लक्ष्मण-शिव की नगरियों पर आतंकी कहर की।

उमा भारती की शर्तें खत्म, वापसी तय

अपने भैरों बाबा ने बीजेपी ज्वाईन नहीं की। कई नेता मनुहार कर चुके। पर राजनीति शुरू हो चुकी। मेरठ, हिसार, आगरा में रैलियां हो चुकी। अब पंद्रह दिसम्बर को भिवानी में। अब के धनतेरस पर जन्मदिन भी कुछ ज्यादा ढोल-नगाड़ों से मना। जन्मदिन का एक रोचक किस्सा बताएं। एक भक्त माला पहनाकर खुशी के मारे रोने लगा। बोला- 'पांच साल से माला लेकर आ रहा था।

नंदीग्राम पर कितना झूठ बोलेगी सीपीएम

अपन ने बीस मार्च को ही लिखा था- 'नंदीग्राम में मुसलमानों की आबादी ज्यादा।' अब जब नंदीग्राम की आग मुस्लिम आंदोलन बनकर कोलकाता पहुंची। बुधवार को आल इंडिया माइनोरिटी फोरम सड़कों पर उतरा। तो लेफ्ट के सेक्यूलरिज्म की पोल खुल गई। प्रदर्शनकारी मुसलमानों पर जमकर गोलियां चली। फोरम के अध्यक्ष ईदरिश अली का दावा- 'हालात खुद सीपीएम काडर ने बिगाड़े।' कोलकाता में सेना बुलानी पड़ी। तो राज्यसभा में अपने दिनेश त्रिवेदी ने हंगामा कर दिया। सो सदन नहीं चला।

कर्नाटक विधानसभा कल भंग होने के आसार

कर्नाटक में राज्यपाल की सिफारिश पर राष्ट्रपति राज लागू किए जाने की रिपोर्ट आज संसद के दोनों सदनों में रख दी गई। रिपोर्ट के साथ राज्यपाल की ओर से भेजी गई सिफारिश की प्रति भी सदन पटल पर रखी गई। सूत्रों के मुताबिक शुक्रवार को दोनों सदनों से राष्ट्रपति शासन की मंजूरी मिलने के बाद देर रात तक विधानसभा भंग की जा सकती है।

नंदीग्राम पर हो जाए तहलका

लेफ्ट ने गवर्नर की आलोचना के बाद अब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष एस. राजेंद्र बाबू को कटघरे में खड़ा किया। नंदीग्राम का जिक्र जो भी करेगा। लेफ्ट के निशाने पर आ जाएगा। गुजरात की तरह नंदीग्राम पर स्टिंग आपरेशन हुआ। तो मीडिया भी लेफ्ट के निशाने पर होगा। वैसे भी सांसदों को लिखी खुली चिट्ठी में सीपीएम ने कहा- 'मीडिया की रिपोर्टिंग एकतरफा।' लेफ्ट चाहता है- 'जो वह कहे, मीडिया वही छापे।' मीडिया को नंदीग्राम में घुसने की इजाजत नहीं।

तो तय हुआ कर्नाटक एसेंबली भंग करना

देवगौड़ा ने पहले कांग्रेस को धोखा दिया। फिर बीजेपी को। अब अपने एमएलए धोखे में रखे। बेंगलुरू से कहकर आए- 'कांग्रेस से बात करूंगा।' पर दिल्ली आकर लंबी तानकर सो गए। देवगौडा के बैठे-बैठे सोने की आदत से तो सब वाकिफ। हकीकत दूसरी। अपन ने कल बुधवार को हुई देवगौड़ा-पृथ्वीराज चव्हाण गुफ्तगू का जिक्र किया। पिछले बुधवार सेंट्रल हाल में हुई थी गुफ्तगू। गुफ्तगू का राज मंगलवार को तब खुला। जब केबिनेट ने एसेंबली भंग करने का फैसला कर लिया। तो चव्हाण ने देवगौड़ा को फोन पर कहा- 'थैंक्यू'

अब एसेंबली भंग ही एक रास्ता

येदुरप्पा सरकार गिराकर देवगौड़ा दिल्ली पहुंच गए। बीजेपी की सरकार नहीं बनने दी। अब यह कहकर मंगलवार को संसद में सेक्युलरिज्म का झंडा उठाएंगे। पर इसे कोई भाव नहीं देगा। सीपीएम ने तो बयान जारी कर कह भी दिया- 'एसेंबली भंग करना ही एक इलाज।' पर एसेंबली भंग करने की मांग करने वाली कांग्रेस के तेवर बदले हुए दिखे। अभिषेक मनु सिंघवी बोले- 'हालात का जायजा लेकर फैसला करेंगे।'

लेफ्ट ने खोला करार का पहला दरवाजा

बहुत शोर सुनते थे पहलू में। जो चीरा तो कतरा-ए-खूं न निकला। लेफ्ट ने आईएईए से बात की हरी झंडी दी। तो अपन को गालिब याद आ गए। गालिब ने यह शे'र लेफ्ट पार्टियों के लिए तो नहीं लिखा। पर लेफ्टियों पर लागू जरूर। डेढ़ साल पहले एटमी करार पर साझा बयान जारी हुआ। तब से हल्ला कर रहे थे। वन-टू-थ्री का ड्राफ्ट जारी हुआ। तब से तो एक ही रट थी- 'करार ऑप्रेशनालाइजेशन नहीं किया जाए।' जब कपिल सिब्बल ने कहा- 'आईएईए से बात करार का ऑप्रेशनालाइजेशन नहीं।'

कलंक गुजरात राष्ट्रीय मुद्दा, पर नंदीग्राम नहीं

संसद की तू-तू , मैं-मैं का एजेंडा तय हो गया। घमासान का मुहूर्त सोमवार का। लोकसभा विजय खंडेलवाल को श्रध्दांजलि देकर उठ गई। राज्यसभा जना कृष्णामूर्ति को। अपने अंदेशे के मुताबिक ही हुआ। छठ को नजरअंदाज कर जिद में पंद्रह से सत्र शुरू किया। पर लालूवादियों ने दबाव से छठ की छुट्टी करवा ली। अब संसद सोमवार को ही बैठेगी। लोकसभा की बीएसी में रघुवंश बाबू हावी हो गए। बीएसी तो राज्यसभा की भी हुई। पर उसमें किसी ने छठ का मुद्दा नहीं उठाया। अलबत्ता नंदीग्राम ही छाया रहा।

बुश की ताकत का इम्तिहान पाक में

बत्तीस साल पहले भारत की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने अपनी कुर्सी खतरे में देखते हुए देश में आपातकाल लगा दिया था। भारत में आपातकाल के बत्तीस साल बाद अब बिल्कुल उन्हीं परिस्थितियों में परवेज मुशर्रफ ने आपातकाल लगाया है। इस संदर्भ से यह नतीजा निकलना गलत नही होगा कि भारत में लोकतंत्र की जो मजबूती आज दिखाई दे रही है वैसी ही मजबूती के लिए पाकिस्तान को बत्तीस साल का इंतजार करना होगा।

आज से संसद में होगी तू-तू, मैं-मैं

मनमोहन रूस से लौट आए। गए थे, तो माथे पर फिक्र की रेखाएं थीं। लौटे तो चेहरे पर रौनक लौट आई। बुधवार को मनमोहन सिंह के चेहरे पर जितनी रौनक दिखी। अपने पड़ोसी देश के हुक्मरान मुशर्रफ के माथे पर फिक्र की उतनी लकीरें। दिन में एक बार तो मुशर्रफ के इस्तीफे तक की अफवाह उड़ी। एक इंटरव्यू में उनने कह दिया- 'जब मेरे जाने से पाक में संतुलन और स्थायित्व हो। तो मैं पद छोड़ दूंगा।'

एटमी करार पर लेफ्ट की हरी झंडी वाया रूस

अपन ने बारह अक्टूबर को लिखा- 'तो रूस से एटमी करार तोड़ेगा लेफ्ट से गतिरोध।' आखिर एक महीने बाद वह ब्रेकिंग न्यूज साबित हुई। न उससे पहले किसी ने लिखा। न बाद में। पहली नजर में दिखता होगा। एटमी करार पर लेफ्ट के तेवर नंदीग्राम ने बदले। अपने यशवंत सिन्हा का अंदाज भी यही। पर नंदीग्राम का असर कम। चीन-रूस का ज्यादा। लेफ्टिए बीजेपी को अमेरिकापरस्त कहते-कहते थक गए। पर अमेरिका ने सारा जोर लगा लिया। आडवाणी नहीं झुके। पर देखा चीन-रूस का असर।

सीपीएम की बेस्ट बेकरी नंदीग्राम

अपन को नहीं लगता सोनिया नंदीग्राम जाएंगी। चली गईं, तो कल की जाती आज जाएगी यूपीए सरकार। पता नहीं दासमुंशी और सिंघवी किस भुलावे में। दोनों ने सोमवार को उम्मीद बांधी- 'नंदीग्राम जा सकती हैं सोनिया।' नंदीग्राम सीपीएम की प्रयोगशाला। जहां एक साल से लोकतंत्र की धुनाई जारी। जो लोकतंत्र की हिमायत में बोले। सीपीएम उसका मुंह काला करने को उतारु। फिर भले वह गवर्नर ही क्यों न हो। गवर्नर गोपाल गांधी ने नंदीग्राम में हरकतों पर नाराजगी जताई। तो करात-वर्धन ने पीएम से शिकायत की। पीएम तो पूरी तरह लाचार।

पर अंगद का पांव नहीं कर्नाटक

येदुरप्पा कर्नाटक के मुख्यमंत्री हो गए। दक्षिण में खाता खुलना बीजेपी के लिए बड़ा जश्न। पर पहले ही दिन पांव लड़खडाने शुरू हो चुके। कर्नाटक में रखा गया कदम अंगद का पांव साबित होता दिखाई नहीं देता। नरेंद्र मोदी का जश्न में मौजूद रहना देवगौड़ा को खटका होगा। सरकार पर देवगौड़ा की सहमति अभी भी शक के घेरे में। एन वक्त पर वह बेंगलुरु से गायब हो गए। शपथ ग्रहण में देवगौड़ा की गैर मौजूदगी आने वाले तूफान का इशारा।

दीवाली की राम-राम

आज दीवाली। गुरुवार को लाल कृष्ण आडवाणी का जन्मदिन था। सो बीजेपी में एक दिन पहले ही दीवाली मन गई। अपनी वसुंधरा समेत बीजेपी के सारे सीएम बधाई देने पहुंचे। नरेंद्र मोदी ही नहीं आए। तो खटका। सीएम-इन-वेटिंग येदुरप्पा भी दिखाई दिए। पर बात दीवाली की। वह भी जमाना था। जब घी के दीए जलते। आतिशबाजी से सुगंध निकलती। लक्ष्मी की पूजा होती। मिठाईयां बंटती। चारों तरफ खुशी ही खुशी। गांधी ने ऐसे ही रामराज की कल्पना की थी।

बनी, तो टिकाऊ होगी येदुरप्पा सरकार

कर्नाटक के सवा सौ एमएलए राष्ट्रपति भवन में परेड करके लौट गए। उसके छत्तीस घंटे बाद भी केंद्र सरकार के सिर पर जूं नहीं रेंगी। बीजेपी-जेडीएस को दावा पेश किए बारह दिन हो चुके। अगर कांग्रेस की सरकार बननी होती। तो इतनी देरी कभी नहीं होती। संघवाद पर दिल्ली में चल रही मीटिंग में गवर्नर की जगह येदुरप्पा आते। गवर्नर की रपट जगजाहिर नहीं हुई। एसेंबली बहाल कर सरकार बनाने की सिफारिश होती। तो इतनी देर नहीं लगती। गवर्नर ने फैसला  केंद्र पर छोड़ा। अब निगाह केबिनेट की अगली मीटिंग पर। अगली मीटिंग में भी कर्नाटक का फैसला नहीं हुआ।

साथ-साथ नहीं, तो आस-पास होंगे चुनाव

भारत-पाक दोनों ही विदेशी दबाव में। दोनों पर दबाव अमेरिका का। मुशर्रफ पर दबाव बेनजीर के साथ सत्ता बांटने का। मनमोहन पर दबाव एटमी करार सिरे चढ़ाने का। अमेरिका दोनों देशों की राजनीति में दखल देने लगा। पाकिस्तान में दखल का नतीजा अपने सामने। मुशर्रफ पूरी तरह तानाशाह हो गए। आवाम में मुशर्रफ की हालत अब बिल्कुल वैसी। जैसी 1976-77 में अपने यहां इंदिरा गांधी की थी।

बेंगलुरु हो या इस्लामाबाद सवाल तो डेमोके्रसी का

चलो, पाकिस्तान से कर्नाटक चलें। पर चलने से पहले थोड़ी सी बात पाकिस्तान की। चौथे दिन भी इमरजेंसी का विरोध जारी रहा। गिरफ्तारियां और सरकारी कहर भी जारी रहा। भारत में इमरजेंसी के समय जो भूमिका जेपी की थी। हू-ब-हू वही पाक में बर्खास्त चीफ जस्टिस इफ्तिखार मोहम्मद चौधरी की। मंगलवार को उनने आवाम से विरोध की अपील की। देशभर के वकील पहले ही सड़कों पर। जहां तक राजनीतिक नेताओं की बात। तो इमरान खान, आसमां जहांगीर, जावेद हाशमी, एतजाज हसन या तो जेलों में या घरों में बंदी। बेनजीर भुट्टो का रुख शक के घेरे में। अमेरिकी राष्ट्रपति बुश का भी।

मुशर्रफ-बुश-बेनजीर खिचड़ी कितने दिन?

पाक में अपना एक यार है अब्दुल कय्यूम। मुशर्रफ ने इमरजेंसी लगाई। तो अपन ने अल्ला बख्श का शे'र  एसएमएस किया- 'पाकिस्तान दियां मौजां ही मौजां, जिधर देखो फौजां ही फौजां।' दो दिन जवाब नहीं आया। तो अपना माथा ठनका। एसएमएस ने कय्यूम को मुसीबत में तो नहीं डाल दिया। पर नहीं, सोमवार को जवाब आया। तो अपन को दोस्त का दर्द महसूस हुआ। अब्दुल कय्यूम का जवाब है- 'तंज (फब्ती) कर रहे हैं आप भी। प्रतिद्वंदी मेरे देश की यह हालत देख खुश हैं। क्या आप भी?' महसूस हुआ, जैसे अपन ने जख्म कुरेद दिए। अपन ने इमरजेंसी का स्वाद सिर्फ एक बार चखा।

पाकिस्तान में मौजां ही मौजां जिधर देखो फौजा ही फौजा

परवेज मुशर्रफ ने अपना रंग दिखा ही दिया। जब देखा- सुप्रीम कोर्ट राष्ट्रपति की उम्मीदवारी ही नाजायज ठहरा देगी। तो इमरजेंसी लगाकर चीफ जस्टिस को गिरफ्तार कर लिया। चीफ जस्टिस इफ्तिकार मोहम्मद चौधरी ही थे। जिनने परवेज मुशर्रफ की नाक में दम किया। पर चौधरी ऐसा कर पाए। इसकी वजह जनता का मुशर्रफ के खिलाफ खड़ा होना था। अगले हफ्ते पाकिस्तान की नेशनल एसेंबली की मियाद पूरी होगी। परवेज मुशर्रफ का राष्ट्रपति वक्फा उसके बाद पूरा होता। पर अगली एसेंबली दुबारा चुनने लायक आए या नहीं। क्या भरोसा।

तोहफे की साड़ियां

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाकात के बाद येदुरप्पा को मुख्यमंत्री बनने की पूरी उम्मीद हो गई थी। वह इतने खुश हुए कि समय न होने के बावजूद पत्नी, बहुओं और बेटियों के लिए दिल्ली से तोहफा खरीदकर ले जाने की योजना बना ली। प्रधानमंत्री के घर से बारह बजे निकले थे, उसके बाद वेंकैया नायडू के घर पर भी मीटिंग चलती रही, पौने दो बजे की फ्लाइट थी, इसके बावजूद साड़ियां और सूट खरीदने का फैसला कर लिया। वेंकैया नायडू के घर से निकलकर येदुरप्पा ने साउथ एक्स पार्ट वन में पहले साड़ियों और सूटों की खरीददारी की और उसके बाद हवाई

मनमोहन का चौका

पिछले दिनों लाल कृष्ण आडवाणी की रहनुमाई में कर्नाटक के सिलसिले में प्रधानमंत्री से मिलने गए प्रतिनिधि मंडल में वेंकैया नायडू भी थे। हालांकि मुलाकात सिर्फ कर्नाटक के मुद्दे पर तय हुई थी, लेकिन वेंकैया नायडू ने धान की कीमत का सवाल कुछ इस तरह उठा दिया कि दक्षिण राज्यों के साथ अन्याय हो रहा है। इस पर मनमोहन सिंह वेंकैया नायडू पर बिफर पड़े। उन्होंने वेंकैया नायडू से कहा कि वह धान की कीमतों के मुद्दे पर दक्षिण और उत्तर को बांटने की कोशिश न करें। वेंकै

प्रियंका का क्रिकेट प्रेम

टेनिस खिलाड़ी प्रकाश पादुकोण की बेटी दीपिका पादुकोण भले ही महेंद्र सिंह धोनी के न्यौते पर ट्वंटी-ट्वंटी क्रिकेट मैच देखने जाए। लेकिन खेल की पारिवारिक पृष्ठभूमि के कारण बात जायज लगती है। जबकि राहुल-प्रियंका की ऐसी कोई पृष्ठभूमि नहीं, फिर भी दोनों ने क्रिकेट मैच के सहारे युवा वोटरों को प्रभावित करने का नया फार्मूला निकाल लिया है। वाजपेयी सरकार के समय पाकिस्तान जाकर भारत-पाक मैच देखने से भारतीय चैनलों पर मिली पब्लिसिटी के बाद राहुल-प्रियंका को यह मुफ्त का नया हथियार मिला है, जिसे इस्तेमाल करने का कोई मौका

मनमोहन का सामान्य ज्ञान

अब तक लोग यही समझते थे कि मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री पद को दिए गए काम की तरह निभा रहे हैं, सीधे तौर पर राजनीति में  ज्यादा दिलचस्पी नहीं लेते। लेकिन आम धारणा के विपरीत अब ऐसी स्थिति नहीं रही। विपक्ष के नेता लाल कृष्ण आडवाणी को भी उस समय झटका लगा, जब कर्नाटक के सांसदों के साथ प्रधानमंत्री से मिलने गए और वहां पर मनमोहन सिंह ने एक सांसद राजीव चंद्रशेखर से पूछ लिया कि वह किस पार्टी में हैं। प्रधानमंत्री किसी सांसद के बारे में इतनी जानकारी रखते होंगे, यह आडवाणी के लिए हैरानी में डालने वाली बात थी

गुस्ताखी राजदूत की

जब तक ब्लैकविल अमेरिका के राजदूत थे, उनका भाजपा के राजनीतिज्ञों से अच्छा तालमेल था। लेकिन मेल्फोर्ड के राजदूत बनकर आने के बाद से स्थिति बदल गई, न सिर्फ तालमेल खत्म हो गया, अलबत्ता तनाव की स्थिति भी पैदा हो गई। इसकी वजह थी मेल्फोर्ड का लाल कृष्ण आडवाणी को दूतावास में आकर मिलने की चिट्ठी भेजना। इस चिट्ठी को देखकर आडवाणी की भौंहें तन गई और उन्होंने इसका जवाब देना भी उचित नहीं समझा। नतीजा यह निकला कि एटमी करार पर आडवाणी से मुलाकात की जरूरत पड़ी, तो अमेरिका के हाथ-पांव फूल गए। आखिर न्यूयार्क में स्थित दक्षिण एशिया के प्रभारी जेम्स क्लेड ने आडवाणी के ओएसडी दीपक चोपड़ा से फोन करके तनाव क

देवगौड़ा की शर्तों से अटका न्यौता

चेन्नई में वेंकैया नायडू कह रहे थे- 'येदुरप्पा को न्यौता नहीं मिला। तो 129 एमएलए लेकर दिल्ली जाएंगे।' पर यह गीदड़-भभकी के सिवा कुछ नहीं। देवगौड़ा की नई चिट्ठी ने गठबंधन में ही आग लगा दी। जेडीएस के एमएलए दिल्ली तो तब पहुचेंगे। जब देवगौड़ा की हरी झंडी होगी। यूपीए-लेफ्ट में वन-टू-थ्री पर छीना-झपटी। जेडीएस-बीजेपी में वन-टू-नाइन पर। देवगौड़ा ने तो शर्तों का पुलिंदा सामने रख दिया। अपन ने कल सही लिखा था- 'बीजेपी माने तो मरी, न माने तो मरी।'

देवगौड़ा की टेढ़ी चाल से बीजेपी हुई बेहाल

देवगौड़ा की टेढ़ी चालों का पता था। फिर भी बीजेपी चाल में फंस गई। तीस अक्टूबर को अपन से एक गलती हुई। असल में देवगौड़ा ने अपनी पहली वाली चिट्ठी वापस नहीं ली। बीजेपी को तभी समझ लेना चाहिए था। देवगौड़ा का मन साफ होता। तो विधानसभा भंग करने की सिफारिश वाली चिट्ठी वापस लेते। नई चिट्ठी लिखते। पर देवगौड़ा ने नई चिट्ठी गवर्नर की बजाए राजनाथ को लिखी। जिसमें ऐसी-ऐसी नई शर्तें। जिन्हें बीजेपी माने, तो मरी। न माने, तो मरी। वैसे तो स्कूल में बच्चों को भी सिखाया जाता है- 'लालच बुरी बला।'

गवर्नर की गेंद केंद्र के पाले में

राजनीति इसी का नाम। सुषमा स्वराज बेंगलुरु में गांधी की मूर्ति के सामने बोली। तो गवर्नर रामेश्वर ठाकुर का कोई लिहाज नहीं किया। अपनी शैली बरकरार रखते हुए गरजी। येदुरप्पा को सरकार बनाने का न्यौता न मिलने पर आंदोलन की चेतावनी दी। पहले से दी गई दो दिन की मोहलत का भी ख्याल नहीं रखा। शाम तक की चेतावनी दे डाली।

'पॉजिटिव रिस्पांस' लेकर लौटे येदुरप्पा

येदुरप्पा अगली बार सीएम बनकर दिल्ली आएं। सो फिर हो न हो। अपन को लगा अभी मिल लिया जाए। पर येदुरप्पा के पास वक्त कहां था। दौड़ते हुए दिल्ली आए। भागते हुए बेंगलुरु लौट गए। पर पीएम से मुलाकात के बाद वेंकैया के घर पहुंचे। तो अपना मिलना तय हो गया। पीएम से मुलाकात में अच्छी खबर थी। सो खुशनुमा मूड में शॉपिंग का प्रोग्राम बना। औरंगजेब रोड से हवाई अड्डे के रास्ते में भागते-दौड़ते शॉपिंग हुई। इसी बीच एक दुकान पर येदुरप्पा से अपनी मुलाकात। खुशनुमा मूड ने अंदर की बात पूछने का मौका ही नहीं दिया। पर अपन ने फारमेल्टी के लिए पूछा- 'पीएम से कैसा संकेत मिला?'