यूएन रूपी भैंस के आगे बीन बजाना

Publsihed: 07.Sep.2021, 07:38

अजय सेतिया / अफगानिस्तान में तालिबान सरकार का गठन इस लिए नहीं हो पा रहा , क्योंकि तालिबान का एक ग्रुप पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई और दो बार के राष्‍ट्रपति पद के उम्‍मीदवार अब्‍दुल्‍ला अब्‍दुल्‍ला जैसेनेताओं को सरकार में शामिल करवाना चाहता है | जहां तालिबान के सैन्‍य कमांडर इसके खिलाफ बताए गए हैं, वहीं दोहा में मौजूद ग्रुप इसके पक्ष में है | तालिबान प्रमुख अखुंदाजादा औरहक्‍कानी ग्रुप मुल्ला बरादर को सरकार में इतना ताकतव

न्यूज़ीलैंड से आतंकवाद की नई शुरुआत

Publsihed: 04.Sep.2021, 09:37

अजय सेतिया / अफगानिस्तान में तालिबान की सरकार बनने के बाद पूरी दुनिया के इस्लामिक कट्टरपंथियों के हौंसले बुलंद हो गए हैं | ताज़ा घटना न्यूजीलैंड की है, जहां तीन सितंबर को सुबह आईएस आईएस के एक आतंकवादी ने एक माल में घुस कर छुरे से छह लोगों को गंभीर रूप से जख्मी कर दिया , जिन में से एक की मौत हो गई और दो मौत से जूझ रहे हैं | जब न्यूजीलेंड जैसे यूरोप के दूर दराज देश में मुस्लिम कट्टरपंथियों के होंसले बुलंद हो चुके हैं तो अंदाजा लगाया जा सकता है कि एशियाई देशों में आंतकवादी आने वाले दिनों में कैसा कहर बरपाएंगे | न्यूजीलैंड की घटना से पूरे यूरोप में मुस्लिम कट्टरपंथियों की ओर से आतंकवादी वा

कबूतर की आँख और बिल्ली का ख़तरा

Publsihed: 31.Aug.2021, 08:55

अजय सेतिया / 21 अगस्त का अपना कालम देखें, अपन ने सवाल उठाया था कि अफगानिस्तान पर तालिबान का कब्जा हो जाने के बाद भी उस का प्रमुख हिबतुल्‍लाह अखुंदजादा कहीं दिखाई नहीं दे रहा | 2016 में अख्‍तर मंसूर के अमेरिकी ड्रोन हमले में मारे जाने के बाद पाकिस्तान में हुई तालिबानियों की एक मीटिंग में उन्हें प्रमुख चुना गया था | अपनी आशंका यह थी कि वह पाकिस्तान की जेल में हो सकता है | पर अब तालिबान ने खुद बताया है कि वह शुरू से ही कंधार में है और जल्द ही जनता के सामने आएगा | लेकिन तालिबान का यह दावा गलत भी हो सकता है की वह हमेशा से ही कंधार में था , क्योंकि उसे 2016 में पाकिस्तान में हुई मीटिंग में च

बिडेन के बलंडर से आतंकवाद के ख़तरे

Publsihed: 27.Aug.2021, 21:51

अजय सेतिया / 26 अगस्त को काबुल हवाई अड्डे पर आतंकी हमले में 200 से ज्यादा लोग मारे गए हैं , इन में बारह तो अमेरिका के सैनिक ही हैं | इस हमले के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति जो बिडेन को समझ नहीं आ रहा कि उस ने आतंकवाद के साथ समझौता कर के सही किया या गलत किया | क्योंकि अफगानिस्तान की चुनी हुई सरकार अमेरिका को बार बार समझा रही थी कि तालिबान में किसी तरह का सुधार होने की कोई सम्भावना नहीं है | अफगानिस्तान सरकार के उपराष्ट्रप्ति रहे अमरुल्ला सालेह ने अब साफ़ साफ़ शब्दों में कहा है कि अमेरिका ने अफगानिस्तान और अफगान नागरिकों के साथ धोखा किया है | आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में अमेरिका का सहयोगी पाकिस्

पंजशीर तालिबान के विरोध की घाटी

Publsihed: 20.Aug.2021, 07:28

अजय सेतिया  / हालांकि इस खबर की पुष्टि नहीं हुई , लेकिन कहीं से कोई खंडन भी नहीं आया है कि अफगानिस्तान एयरफोर्स की पहली महिला पायलट साफिया फिरोज को पत्थर मार मार कर मार दिया गया है | वह पिछले पांच साल से अफगानिस्तान एयरफोर्स में पायलट के तौर पर तालिबानियों के खिलाफ लड रही थी | 1990 में जब रूस की सेनाएं वापस चली गई थी और अफगानी सरदार आपस में लड रहे थे तो साफिया का परिवार काबुल से भाग कर पाकिस्तान चला गया था , जहां उस का बचपन शरणार्थी के तौर पर बीता था | महिलाओं को आज़ादी बरकरार रखने के अफगानी दावे के बावजूद महिलाएं और महिलाओं को नौकरी देने वाल

क्या भारत की कूटनीतिक विफलता

Publsihed: 17.Aug.2021, 19:49

अजय सेतिया/ तालिबान जैसी आतंकवादी और धार्मिक कट्टरवादी
सरकारों के साथ संबंध रखने के मुद्दे पर भारतीय
कूटनीतिज्ञ कहा करते थे कि “ट्रस्ट बट वेरीफाई” |
हालांकि तालिबान की वापसी अमेरिकी कूटनीतिज्ञों के
साथ समझौते के तहत हुई है , लेकिन यह समझौता
ऐसा नहीं था कि अमेरिकी फौज की रवानगी से पहले
ही वह हथियारों के बल पर कब्जा कर लेगा | बातचीत
सत्ता में हिस्सेदारी की हो रही थी और तालिबान ने
अमेरिका समर्थक सरकार को हथियारों के बल पर
उखाड़ फैंका | अमेरिका का समर्थन होने के बावजूद चुने
हुए राष्ट्रपति अशरफ गनी रातों रात ओमान भाग गए |

आस्तीन का सांप तो पाकिस्तान है

Publsihed: 15.Aug.2021, 23:30

अजय सेतिया / अमेरिकी राष्ट्रपति जो बिडेन ने 30 अगस्त तक अमेरिकी और नाटो फौजों की अफगानिस्तान से वापसी की घोषणा की थी | जिस दिन यह घोषणा हुई , उसी दिन से तालिबानियों ने अपनी वापसी का एकतरफा एलान कर के प्रान्तों पर कब्जे शुरू कर दिए | नाटो फौजों की वापसी के एलान के बाद लाचार अफगानिस्तान सरकार ने तालिबानियों से सत्ता में हिस्सेदारी की पेशकश की | कतर की राजधानी दोहा में अफगान सरकार और तालिबानियों में बातचीत शुरू हुई थी , 12 अगस्त को विफल हो गई और उस के दो दिन के भीतर तालिबान ने लगभग पूरे अफगानिस्तान पर कब्जा कर लिया |