दोस्त, दुश्मन की पहचान जरूरी

Publsihed: 01.Jan.2008, 20:40

हम भारतीय इतने सुसंस्कारित हैं कि मरे हुए व्यक्ति की बुराईयां नहीं देखते। ऐसा नहीं कि ऐसी सुसंस्कृति अपने पड़ोसी देश पाकिस्तान की नहीं। आखिर भारत और पाकिस्तान एक ही देश के विभाजन से ही तो बने हैं। धर्म और पूजा पध्दति को छोड़ दें, तो दोनों देशों की संस्कृति, भाषा-बोली, रहन-सहन एक जैसा ही है। इसीलिए बेनजीर भुट्टो की हत्या पर हम भारतीयों को गहरा सदमा लगा। भले ही बेनजीर ने कभी भी भारत के साथ दोस्ती की वैसी पैरवी नहीं की, जैसी नवाज शरीफ ने की। या कारगिल की साजिश रचने के बाद परवेज मुशर्रफ भी करते रहे हैं। हालांकि मेरे जैसे करोड़ाें भारतीय परवेज मुशर्रफ पर भरोसा नहीं करते, वह बाकी पाकिस्तानी शासकों से कहीं ज्यादा मक्कार और जुबान के कच्चे हैं।

बेनजीर और नवाज शरीफ का पाकिस्तान

Publsihed: 21.Oct.2007, 11:15

बेनजीर भुट्टो की पाकिस्तान वापसी ने परवेज मुशर्रफ की मुश्किलें कम करने की बजाए बढ़ा दी हैं। तालिबान के खिलाफ अफगानिस्तान में अमेरिकी कार्रवाई का समर्थन करके परवेज मुशर्रफ ने पाकिस्तान में अपनी हकूमत की मियाद तो बढ़ा ली। लेकिन परवेज मुशर्रफ की अपनी साख लगातार घट रही है। पाकिस्तान समेत दुनियाभर का आम मुसलमान अमेरिका को इस्लाम विरोधी मानता है और जो भी मुस्लिम नेता अमेरिका का साथ देता है, उसे इस्लाम विरोधी मानने लगता है। यह  धारणा अब परवेज मुशर्रफ के बारे में भी बन चुकी है, इसीलिए इस्लामिक कट्टरवादियों ने उन पर तीन बार कातिलाना हमला किया।